जादुई एम्बुलेंस

कोरोना वायरस की पहली लहर से तबाह हुए अनगिनत परिवारों में प्रसाद का छोटा परिवार भी था. बहुत ही मुश्किल से वे अपने ko बचाए रखने में कामयाब रहे। हालांकि, उनकी बदकिस्मती अभी खत्म नहीं हुई थी । दूसरी लहर उनके लिए कयामत लेकर आई थी।

 

एक मजदूर के रूप में प्रसाद आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे थे लेकिन फिर भी, उन्होंने जितना हो सके उतना पैसा बचाया और अपने परिवार को सुरक्षित रखने की कोशिश की। लेकिन उनकी बचत केवल कोरोना की पहली लहर में ही उनकी मददमुश्किल से कर पाई। वे भी इस मुश्किल के लिए अन्य लाखों लोगों की तरह तैयार नहीं थे कोरोना की पहली लहर के बाद प्रसाद ने कई तरह के काम किये पर ज़्यादा बचत नहीं कर पाए।

 

इस समय तक हालात बदतर हो गए थे । प्रसाद को कोरोना हो गया था।। प्रसाद की हालत और खराब हो गई। जल्द ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। प्रसाद को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया गया । किस्मत अच्छी थी कि उसे वहां बिस्तर मिल गया। लेकिन सबसे बुरा समस्य अभी भी खत्म नहीं हुआ था। प्रसाद की तबीयत खराब हो गई। उन्हें जल्द ही आईसीयू और ऑक्सीजन की जरूरत थी। लेकिन सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन आईसीयू उपलब्ध नहीं था। उनका परिवार दहशत में थाकी वे प्रसाद को खो देंगे इसी कारण, उन्हें आवश्यक सुविधाओं के साथ एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करना पड़ा।

 

भारत में दूसरी लहर के चरम पर, जहां कोरोना वायरस से लड़ने के लिए संसाधनों की कमी सबसे अधिक थी, हस्पताल मैं बिस्तर प्राप्त करना लगभग असंभव था। फिर भी, प्रसाद का परिवार एक बिस्तर खोजने की कोशिश मैं लग गया। एचआर हेल्पडेस्क ट्रस्ट ने, जो की कोविड राहत गतिविधियों में शामिल था, को जल्द ही प्रसाद के बारे में पता चला और उन्हें आवश्यक सुविधाएं खोजने में मदद की। संस्था की मदद से परिवार को एक निजी अस्पताल में बिस्तर मिल सका। हालात अभी भी बेहतर नहीं थे। कोरोना वायरस के कारण अत्यधिक बोझ के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाने का मतलब था कि सभी मौजूदा सुविधाओं को उनकी हालत पर छोड़ दिया गया था। और लाभ कमाने के लिए, कई अस्पताल और अन्य आपातकालीन सुविधाएं अब प्रत्येक सुविधा के लिए अत्यधिक मात्रा में शुल्क ले रही थीं। अस्पताल में भर्ती कराने के लिए परिवार को कई लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा। किसी तरह उन्होंने अपने परिवार की मदद से आवश्यक राशि अर्जित की।

 

जिस अस्पताल में उन्हें कमरा मिला वह 4 घंटे की दूरी पर था। इसी दूरी को एम्बुलेंस द्वारा 2 घंटे में तय किया जा सकता था । ऐसी स्थिति में नियमित एम्बुलेंस भी नहीं मिल रही थी प्रसाद की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, उन्हें ऑक्सीजन सुविधा की आवश्यकता थी। ये साधन न केवल दुर्लभ थे, बल्कि महंगे भी थे। पैसे का अत्यधिक शुल्क एम्बुलेंसों ने भी बढ़ा दिया था, और अब वे पूर्व-कोविड के मुलकाबले दोगुनी राशि वसूल कर रहे थे। परिवार ने हमारे ट्रस्ट के साथ मिलकर सभी मांगों को पूरा किया। प्रसाद को सफलतापूर्वक अस्पताल में भर्ती कराया गया और 20 दिनों तक संघर्ष करने के बाद, वह पूरी तरह से ठीक हो गए।

 

प्रसाद का मामला उन भाग्यशाली लोगों में से है, जिन्होंने विशेष रूप से उस असहाय अवस्था में होने के बाद भी कोविड को मात दी, और वह उचित उपचार प्राप्त करने में सफल रहे। बहुत से आम लोग कोविड के के वायरस के कारण नहीं, बल्कि चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी के कारण मारे गए।

 

प्रसाद की ज़िंदगी समय पर सहायता मिलने के कारण बच पाई। कई लोगों ने दवा और अन्य सुविधाओं का पता लगाने के लिए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके इंटरनेट की मदद से तत्काल सुविधाएं पाईं। लेकिन यहां भी आबादी का एक छोटा हिस्सा ही मदद ढूंढ पा रहा था। केवल वे ही ऐसा करने में सक्षम थे, जिनके पास इंटरनेट था, वहीँ एक बड़े वर्ग के पास ये सुविधा नहीं थी।

भारत में कोरोना वायरस के दौरान स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में भारी गिरावट देखी गई, जो वायरस की दूसरी लहर के दौरान चरम पर थी। इस समय के दौरान दवा, ऑक्सीजन सिलेंडर और यहां तक कि बिस्तरों जैसी उचित चिकित्सा सुविधाओं की भयानक कमी ने व्यापक दहशत और अराजकता पैदा कर दी, जहां कई संसाधनों को जमा किया जा रहा था या बेहद ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा था।

 

धनी और साधन संपन्न लोगों ने महामारी से बचने के तरीके खोजे और यहां तक कि महामारी से लाभ भी कमाया, जबकि आम लोगों ने इस महामारी की भरी कीमत चुकाई। एचआर हेल्पडेस्क पर हमारे सहित कई लोगों ने संसाधनों की व्यवस्था करके और उन्हें उन लोगों के लिए उपलब्ध कराकर मदद करने की पूरी कोशिश की, जिन्हें इसकी आवश्यकता थी। हमने अपने सामर्थ्य के अनुसार पूरी कोशिश की और ज़रूरतमंद लोगों की मदद की ।

 

जबकि देश मैं कोरोना की तीसरी लहर के कयास लगाए जा रहे हैं हम आशा करते हैं कि इसे ठीक से प्रबंधित किया जाएगा। हमें उम्मीद है की इस बार, स्थिति वैसी नहीं होगी जैसी कि पहली और दूसरी लहर के दौरान थी। लेकिन अगर ऐसा होता है, और लोगों को मदद की ज़रूरत होती है, तो हम हर संभव मदद करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे। इसके लिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप उनकी मदद करने के लिए हमारे साथ दें। आइए हम सब मिलकर इस कठिन समय से निकलने का संकल्प करें ।